105 डिग्री बुखार होने पर क्या होता है?HealthPlanet

Posted on Mon 28th Nov 2022 : 16:35

बुखार की स्थिति तब बनती है जब हमारे शरीर में मौजूद सैनिक या ऐंटिबॉडी बाहर से आए हुए ऐंटिजेन यानी वायरस या बैक्टिरिया या किसी भी तरह के इन्फेक्शन से लड़ने में फेल हो जाते हैं। तब शरीर के पास ऐसे ऐंटिजेन की संख्या को काबू में करने का एकमात्र तरीका होता है शरीर का तापमान बढ़ना। जब शरीर का तापमान बढ़ता है तो हमारे शरीर में मौजूद हार्मोंस और एंजाइम की ऐक्टिविटी धीमी होने लगती है और हम सुस्त पड़ जाते हैं। साथ ही बाहर से आए हुए ऐंटिजेन के लिए भी ज्यादा तापमान पर अपना प्रॉडक्शन बढ़ाना मुश्किल हो जाता है। अगर ऐंटिजेन का प्रॉडक्शन धीमा हो जाए या रुक जाए तो बुखार का बढ़ना भी रुक जाता है। लेकिन इन्फेक्शन ज्यादा है तो शरीर का तापमान बढ़ता चला जाता है। ऐसे में फीवर 104, 105 डिग्री फारेनहाइट तक चला जाता है। इतने तापमान पर मरीज को मिर्गी जैसे दौरे पड़ने लगते हैं और बेहोशी छाने लगती है। घर में अगर ऐसी स्थिति बनती है तो ठंडी पट्टी रखी जाती है। डॉक्टर पहले फीवर कम होने की दवा देते हैं, फिर इन्फेक्शन की जांच कराकर ऐंटिबायोटिक देते हैं।

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